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✦ हमारे आराध्य देव ✦
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✦ प्रेरणादायक सुविचार ✦
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि ।
तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि देही ॥
— श्रीमद्भगवद्गीता (2.22)
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